छावनी विधान सभा के सर्वेन्द्र सर्राफ की राजनिती के चक्कर मे बंद हो गई सर्राफे की दुकान !कभी महाना जी के "नवरत्न "थे आज कोई पूछने वाला नहीं !!!!!!!
(आलोक मेहरोत्रा की कलम ) 1980 मे भाजपा का गठन हुआ तब से 1993 तक संघर्ष किया उसके बाद पार्टी ने संघ के अनुसांगिक संगठनो की वजह से 2 सीट से पूर्ण बहुमत पाया ज़िसमे हजारों कार्यकर्ता का खून -पसीना शामिल है लेकिन पूर्ण बहुमत के बाद की जो तस्वीर सामने आ रही है वह भयाभय है निष्ठावान की पूछ ही नहीं रही ज़िन लोगो के परिवार ने संघर्षकाल मे भाजपा व संघ विचार परिवार के कार्यकर्ताओ को मुखबरी कर जेल भिजवाया आज वह भाजपा के बड़े नेता है ज़िन्होने तन -मन -धन दिया वह पर्दे के पीछे हैं !तमाम वे लोग घर पर है ज़िन्हे सम्मान तक नही मिला बात करते हैं छावनी विधान सभा के सर्वेन्द्र सर्राफ की सोने चांदी का दानाखोरी मे बड़ा कारोबार था लेकिन राष्ट्रभक्ती के चक्कर में वे अपना सब कुछ गंवा बैठे आज छोटा कारोबार कर के दाल रोटी चला रहे हैं स्वर्गीय हरि दीक्षित के सानिध्य में बजरंग दल में काम करना शुरू किया 1986 से 1989 में हरि दीक्षित छावनी विधानसभा से चुनाव लड़े तब उनके चुनाव में सक्रियता से राकेश मित्तल बृजेश पांडे के साथ निरंतर लग रहे फिर युवा मोर्चा वार्ड अध्यक्ष का दायित्व मिला तब संगठन को मजबूत करने का काम किया 1991 से 2012 तक श्री सतीश महाना के सभी पांचो चुनाव में शक्ति केन्द्र प्रमुख के दायित्व को निभाया राम मंदिर आंदोलन मे सक्रिय भूमिका अदा की आज उनकी खबर लेने वाला कोई नहीं 1986 से अब तक का पूरा जीवन भारतीय जनता पार्टी के प्रति ही समर्पित रहा है और रहेगा हम लोगो को उनके त्याग को जान कर उनका सम्मान करना सभी का कर्तव्य है .....
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