विशुद्ध पत्रकारता की राजनैतिक बीट के वरिष्ठ पत्रकार सौरभ शुक्ला ने !!!!!!
कुछ अवसरवादियो ने नहीं बनने दिया प्रेसक्लब का अध्यक्ष !
(आलोक मेहरोत्रा की कलम ) पत्रकारिता, समाज की दिग्दर्शिका और नियामिका का काम करती है. यह भारत के लोकतंत्र की रीढ़ है, जो संविधान में निहित मुक्त भाषण और अभिव्यक्ति के सिद्धांतों को कायम रखती है. पत्रकार नागरिकों को सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रमों, और सामाजिक मुद्दों के बारे में सूचित करने में अहम भूमिका निभाते हैं लेकिन कानपुर के कई पत्रकारो ने चौथे स्तंभ की भूमिका पर दाग लगा दिया लेकिन कुछ पत्रकार ऐसे भी हैं जो दूसरो के सुख दुख के सदैव भागीदार रहे उनमे से नाम बड़े भाई सौरभ शुक्ला का भी है वर्ष 2000 से 2005 तक मालरोड से निकलने वाले हिंदुस्तान अखबार की बात करता हूँ तब लखनऊ से प्रकाशन होता था गिनती की कापी कानपुर मे बिकती थी तब से आज तक सहारा मे भूमिका अदा करने वाले बे बाक लेखक सौरभ जी ने हिंदुस्तान अखबार मे तहलका मचा दिया था अखबार कानपुर से प्रकाशित होने लगा खबरो मे भी खूब धूम मचा दी थी लेकिन क्या मजाल है जो सौरभ जी ने अपनी कलम का सौदा किया हो या किसी ने उनकी कलम खरीदने का प्रयास किया हो या किसी की जमींन पर कब्जा करने का प्रयास किया हो सौरभ जी ने कभी किसी को किसी प्रकार से परेशान नहीं किया न ही कोई मांग की लेकिन बदलते युग के चाय बेचने वाला पंचर बनाने वाला पत्रकार बन गया पत्रकारता का मान गिरा दिया लेकिन सौरभ जी इससे दूर रहे नतीजा ये हुआ इनको कुछ मठाधीशो ने प्रेसक्लब का मुखिया नहीं बनने दिया नमन करता हूँ सौरभ जी की पत्रकारता को 🙏उन्होने कोई हत्या नहीं की न ही किसी की भूमि के जबरन कागज बनवाये सौरभ जी का भी नेता आपनी प्रेस कानफरेंस मे इंतज़ार करता था गर्व है सौरभ जी आज के युग के चोर पत्रकार नहीं है .....क्रमश :!!!!!!!
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